Saturday, 4 November 2017

आलिंगन

तुम...

आनन्द अवर्णनीय आलिंगन हो

एक बच्चे की चंचलता सी
और सन्यासी का चिंतन हो

तुम ताज़ा ताज़ा मलयज सी
गोमती ताप्ती सतलज सी
तुम हरी श्वेत केसरिया हो
और चाँद दूध का मिश्रण हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो

तुम अविरल छाया हो वट की
और बस्ती हो सागर तट की
तुम विकल्प एकमात्र, प्रश्न का
तुम ही हो आनंद जश्न का
तुम प्रगाढ़ वो प्रेम हमारा
तुम झगड़े तुम अनबन हो ..
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो

तुम इंद्र धनुष आकर्षण हो
तुम प्रकृति का परिवर्तन हो
बस तुम ही हो इतिहास मेरा
और तुम भूगोल का दर्शन हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो

तुम बारिश की हर बूँद प्रिये
और बूँद बूँद का प्यासा मैं
तुम शोणित रवि से बनी किरण
तुम धवल चाँद का करो वरण
मैं रक्त-रंग हूँ उजला भी
तुम रंग-प्रभा का ईधन हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो

Thursday, 2 November 2017

आओ यौवन बुला रहा है

अति कोमल, चंचल सरिता सी,
रक्त ललित होंठो की लाली
नैन नशे से भरे परे
परे जिनके एक संसार

धीरे धीरे

सबकुछ मुझको भुला रहा है
आओ यौवन बुला रहा है

सेज सजा है फूलों वाला
अरमानो के तकिये पर
छोड़ने आएंगी सखिया
जैसे भोर का कोहरा
सुन्दर चाँद को ...

धीरे धीरे

देखो खुद में मिला रहा है
आओ यौवन बुला रहा है

ये बस एक छन भर है
अमृत टपकेगा अधरों से
प्यासी है धरती मेरी
इसे चाहिए पहली वर्षा
वो वर्षा जिसका
पानी

धीरे धीरे

देखो तुमको भिगा रहा है
आओ यौवन बुला रहा है

Saturday, 30 September 2017

Suno Tum

1
सुनो जो फैसला तेरा है उसपे
गौर कर लो तुम

सितम और जुल्म करना है तो थोड़ा
और कर लो तुम

जमाना मेरा है मुझको सजा होने नही देगा

गिरा के जुल्फें अपनी, दौर अपने
ओर कर लो तुम

2
मुकदमा तुम नही करना उसे मैं जीत जाऊँगा

तुम्हारी बे वफाई के वहाँ मैं गीत गाऊँगा

अदालत को मेरे सुर ही लगेंगे इतने प्यारे कि

तुम्हे वो ही सजा देगा तुम्हे जो मैं सुनाऊँगा

3
किया तुमसे जो मैंने वो कहाँ पर प्यार ढूंढोगे

मुझ सा बे गुनाह क़ातिल कहाँ पर यार ढूंढोगे

उन्होंने जुल्फों और मुस्कानों से ही कत्ल कर डाले

हुआ है क़त्ल जिससे वो कहाँ हथियार ढूंढोगे

Friday, 8 September 2017

चाहता हूँ

बड़े शौक से रखता है दुकानदार बकायेदारों का...
वो हिसाब बनना चाहता हूँ

प्रेमी का प्रेम ग्रन्थ हताश की आश पढ़ने वाले की मनपंसद
एक किताब बनना चाहता हूँ

देखते हो आप मेरे माँ बाप मेरे हितजन जो रात दिन
वो ख्वाब बनना चाहता हू

बिगड़े तो बहुत हैं पैसे वाले भी हैं, हाँ भले ही गरीब
पर नायाब बनना चाहता हूँ

करते हैं बलात्कार वो बेकार कुत्ते जो उनके लिए जलने वाला
वो तेज़ाब बनना चाहता हूँ

एक अच्छा दोस्त अच्छा बेटा अच्छा भाई अच्छा पति भी
और अच्छा बाप बनना चाहता हूँ

पढ़ सकूँ पढ़ा सकूँ सीखा हूँ जो सिखा सकूँ
जानने की प्यास बुझा दूँ
वो आब बनना चाहता हूँ

विशाल हाथी जैसे भ्रष्टाचार को उखाड़ जो फेंके कहीँ
वो उकाब बनना चाहता हूँ

हिन्दू हूँ मुस्लिम हूँ सिख हूँ ईसाई हूँ जयकारा संखनाद प्रणाम हूँ
और इंकलाब बनना चाहता हूँ

Saturday, 19 August 2017

Pyar

आज सोचा तुम्ही से ये है इश्क़ क्यों
लाखों सूरत और सीरत हैं संसार में

मर मिटा तेरे झूठे से वादों पे क्यों
क्यों फनाः यूँ हुआ मैं तेरे प्यार में

ये अदा शोखियां मस्तियां ये मेरी
मेंरी नीलम सी आँखों की मदहोशियां...

मेरा बच्चों सा दिल है कहाँ तू बता
जा मिले तो तू ले लेना बाजार में

मैं हंसा जोर से उसकी इस बात पे
पूरी बच्ची है दिल भी है मासूम सा

कहती परछाई से साथ क्यों हो मेंरे
क्या कमी है मेरे प्यारे से यार में...

चाँद भी छिप गया बादलों में कहीँ
खुद से प्यारा हुस्न गया देखा नहीं

पत्तियों ने भी गिर कर के पतझड़ किया
कलियों ने भी बगीचों में भगदड़ किया

जब सभी खूबियां इसको दे दी खुदा...
क्यों बनाया हमें फिर बेकार में..

हम ने ये सोच कर तुमको चाहा नहीं
कि अप्सरा मेनका हो या हो तुम परी
हम तो मासूमियत पे फ़िदा हो गए
देख के तेरे चेहरे की जादूगरी

चलो तुमको ले के जाऊँ मैं चाँद पे
कब से बैठा हूँ मैं तेरे इकरार में..

Sunday, 13 August 2017

Kanha ka janamdin

जो काम बड़ा मुश्किल है
करना जो ना मुमकिन है

वो पल भर में कर जाये
कन्हैया का जन्मदिन है

जो मुरली कहीं बजाये
कहीं डाल डाल पे कूदे
कहीं गोपी वस्त्र चुराये
घर घुस जाये आँखे मूदे

जो प्रेम लीला के वश में
विष्णु से बालक बनते
कभी मक्खन चोर कहाते
कभी प्रजा के पालक बनते

कुछ कोई नहीं धरती पे
कुछ भी नहीं जिनके बिन है

उस नटखट नन्द किशोरे
कान्हा का जन्मदिन है

वो माँ की डांट है खाते
जो सारी सृस्टि चलाते
वो हर गोपी के साजन
वो सबसे रास रचाते

जो छीर सागर के मालिक
वो यूँ नवनीत चुराते
जिनके वश में है दुनिया
वो गोपियों से घबराते

ये सब उनकी माया है
वो कण कण है तृन तृन है

जो राज दिलों पे करता
नटराज का जन्मदिन है ..

Wednesday, 2 August 2017

Shikayat

खुदा तुमसे शिकायत है...

अता कर उनको भी दौलत दिलों की
जिनके हुस्नो के कसीदे पढ़े जाते हैं
उन्हें तो प्यार करना भी दिल्लगी लगती है
नाज ए हुस्न है जिन्हें, बड़ा इतराते हैं

लबों पे हँसी आँखों में आँसू है क्यों?
खुद पे ही रोते हो, हाँ मैंने ठीक देखा है
साथ पाने को पल भर जिसका नाते तोड़े
उसे गैरों की महफ़िलों में शरीक देखा है

ये दिल का लगाना जान ले लेगा यारो
वो हुस्न है नही जलता हुआ अंगारा है
सूरज भी देखो दूर रहके ही रौशनी देता
उसे पाने की गर सोचो कसूर तुम्हारा है

दिया गर मुखड़ा चाँद सा उनको तो
शीशे सा पिघलता हुआ उन्हें दिल देते
या तो दे देते नस्तर हमें कोई ऐसा
अपने अरमान दिल के सारे सिल देते

ना होश खोते उन्हें देख के मुड़ते हुए
ना मर ही जाते उन्हें देख के हस्ते हुए
ना इरादा कोई अरमान या वादा कोई
ना गश खाते उन्हें देख के सजते हुए

पर...

कहदे उनसे कोई हम ऐय्याश नही हैं
उनसे दो बात करते हैं ये शराफत है
वैसे तो गैरों की महफ़िलो में जाना नही होता
उनकी आँखों में डूबने की पर इजाजत है

खुदा तुमसे शिकायत है....

Tuesday, 1 August 2017

Ek vada

वफ़ा के चर्चो में जिनकी हम मिशाल देते थे
जिनके हौसले हर मुश्किल को टाल देते थे
उन्हें सूरत भी अब वो नागवार लगती है
जिसकी तस्वीर देख दिन वो निकाल देते थे

कहते दर्द आँखों में तुम्हारे ना देख पायेंगे
उनकी इन बातों से लगता वो जरूर आयेंगे
हर तरफ के रास्तों में अब अंधेरे होने लगे
उनका कहना था आये तो तुममे खो जायेंगे

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

तुम तो एक पल में आके चले भी गए
ख्याल फिर भी रहा है तुम्हारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम....

वादा था कि शकल मेरी देखोगे ना
कांच पे मेरे पत्थर भी फेंकोगे ना
मेरी गलियों से आना नहीं होगा अब
नाम मिट्टी में मेरा उकेरोगे ना

मेरे सीने पे सर रख के सोवोगे ना
बाजुओं से लिपटकर के रोवोगे ना
चाहे रोते हुए आंसू बहते रहें
अपने हाथों से आंसू भी पोछोगे ना

बोले थे, हम अलग हैं किनारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

वैसे यूँ तो वफ़ा में तुम मशूहूर हो
पर मुझसे ही क्यों बेवफाई किया
एक वादे से मुझको अपना लो तुम
एक वादे से जैसे पराई किया

या तो कुछ कर दो यादें ना आये तेरी
ये हवाएं वफ़ाएं ना गायें तेरी
किस कदर बे वफ़ा तू है मैं जानती
ये हवाएं गुनाहें बताएं तेरी..

अगर वादा था मेरा ना होने का-2

सपनो में आके फिर क्यों पुकारा सनम...

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी न दोबारा सनम

क्या कहा था तुमने --
सच्ची मोहब्बत का दावा सभी करते हैं
मुझपे मरते हो तो क्या? सभी मरते हैं

पर सुनो ना बाबु -
पर रूह से मोहब्बत तो तुम्ही करते हो
जिस्म से मोहब्बत यहाँ सभी करते हैं

तोड़ दो सारे वादे हुए जो कभी
तेरे बिन जीना मुझको ना गवारा सनम

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

Friday, 28 July 2017

Najar - 2

चाहो उसको पिला दो नशा नैन से
या तो मर जाने दो गोद में चैन से

चाहे जीने की कोई वजह दे दो तुम
या प्यार करने की कोई सजा दे दो तुम

नासमझ है थोड़ा थोड़ा पागल भी है
पाने को साथ तेरा वो व्याकुल भी है

कहीं ऐसा जखम ना दे देना सनम
घाव जिसका कहीं ना दिखा वो सके

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई  अंजाने में ना फ़िदा हो सके

चलो माना कई हैं ऐसे आशिक़ तेरे
कौन लेगा सितम उसके माफिक तेरे

कौन देगा तुझे फिर तौफा-हँसी
कौन झूठे वादों पे करेगा यकीं

कौन सपनो को तेरे जियेगा यहाँ
ऐसे आशिक़ जमाने में मिलते कहाँ

ऐसी कीमत ना रख देना दिल देने की
जिसकी कीमत कभी ना चुका वो सके

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके

चाहे दिल में बस अपने जगह भर ही दो
या प्यार है उससे झूठी सी हाँ कर ही दो

तेरे इकरार नामे से शायद हसीं
मरता उसका जिसम भी जवां हो सके

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके

Najar

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके

कहीं ऐसी तलब इनकी लग जाये ना
उम्र भर वो कभी ना जुदा हो सके

हीरे जैसी चमक तेरी आँखों में है
इस फ़िज़ा की महक तेरी सांसो में है
हर मरज की दवा तेरी बाँहों में है
हर तरफ की हवा तो पनाहों में है

चाँद को दूध में घोल कर हो बनी
कहीं बरसात कर दें न जुल्फें घनी

मर्ज ऐसा कहीं उसको हो जाये ना
हर शहर में ना जिसकी दवा हो सके

आँख में आँख डाले अगर वो कहीं
आँख अपनी कहीं वो उठा ना सके

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके

चाहो तो ए सनम तुम तबाही बनो
चाहे जीने के मेरे वजहही बनो
तिरछी नजरों से पल भर में घायल करो
या तो नजरें झुका करके पागल करो

दिल तो दे ही दिया चाहे खेलो उसे
चाहे बाँहों में अपनी ले लो उसे

देखो कईयों के दिल से न खेला करो
कहीं तुमसा कोई ना बे वफ़ा हो सके

अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके

Sunday, 2 July 2017

Bewafa pyar

Kya khte ho maaf kar du use

Dil ko mere pathhar sa banna padega

Ansuoye ke sailab bahaye hai uski laut aane ki raah par

Ghanghor barish me use anusuone ko mere sunna padega

Darwaje maine dil ke khol rakhe hai uski khatir

Mera pyar ya meri maut use ek ko chunna padega

Araman e chahat e mohhabt e raj sare

Jis tarah mai khul gya use khulna padega

Kadi kadi si thi chahat jud kr mohhabt hui

Use bhi is qatar me judna padega

Falaq ko cheer ke gar vo sitaro ko chali gayi hai

kasam hai mere pyar ki use mudna padega

Ha gar use kabil mujhse jyada mil gya
Maaf kar dunga tab

Par angaron sa mujhe jalna padega
Dil ko mere pathhar sa banna padega    

Sunday, 18 June 2017

Muskan

नहीं मांगा खुदा और कोई सामान
उसके चेहरे पे हो बस हमेशा मुस्कान

हुस्न पर सब फ़िदा
ऐसी जादूगरी सी
ऐसा हीरे का टुकड़ा
अप्सरा सी परी सी

खुश हो प्यारी कली वो मासूम जान
नहीं माँगा खुदा और कोई सामान

नहीं चाहा मुझे तू हर इक ख़ुशी दे
नहीं कहता मुझे अम्बानी बना दे
उसे मुझसे थोड़ी मोहब्बत जो ना हो
नहीं कहता उसको दीवानी बना दे

पर उसके प्यारे से होंठो पे तालों से
कैद हो के उसी पे बना ले मकान...

उसके चेहरे पे हो बस हमेशा मुस्कान
नहीं माँगा खुदा और कोई सामान

मुझे प्यार उससे है
उसे भी पता है
मैं बताऊँ जताऊं ना
क्या इसमें खता है

नहीं कहता उसको तू राजी कराके
मेरी नजरों में हो जाये महान

उसके चेहरे पे हो बस हमेशा मुस्कान
नहीं माँगा खुदा और कोई सामान

ना राहत अरिजीत ना मालिक अमान
ना जग जाहिर कर तू रहने दे अंजान

मेरे हिस्से में जो गर थोडी सी हँसी हो
उसको लाखो गुना कर उसको देदे दान

उसके चेहरे पे हो बस हमेशा मुस्कान
नहीं माँगा खुदा और कोई सामान।

Sunday, 11 June 2017

Its for alia

O very cute alia
meri cute alia

Tujhe dekh kejrival bhi
ho jaye mute alia

Teri ek smile dekh dil mera dole hai
Sapno me sote me ye love u bole hai

Tu na dimple dal ke simple sa bhi hasti hai
Teri smile se meri cutie diamond bhi sasti hai

Gajab ki voice O mango slice tera anmol hai price
Gajab ka dance badi advance lage tu very nice

Hai ek request nhi ye jhoot alia
Mai hu square tu ban ja meri square root alia
O meri cute alia very cute alia ....

Wednesday, 31 May 2017

क्यों लिखूँ

क्यों लिखूं मैं?

क्यों हो रहे दुष्कर्म जो
उस नीचता पाप की
क्यों बढ़ाई भाजपा की
क्यों बढ़ाई आप की

नर के मन में व्याप्त विष का
क्यों मैं अब वर्णन करूं
मूक हूँ ! क्यों न बैठ के इन सब
पे बस क्रन्दन करूँ

क्यों लिखू की बुरा ये
जातियों का भेद है
क्यों मैं बंटू ज्ञान जब
पढ़ने को गीता वेद है

हर तरफ जो है गरीबी
वो व्यथा मैं क्यों लिखूं
मर रहे हर रोज भूखे
वो कथा मैं क्यों लिखूं

है कटोरा हाथ में
बच्चे के तो मैं क्या करूँ
है करोड़ो लोग
तो मैं ही क्यों दया करूँ

मुझे उनसे क्या जिन्हें
चना क्या पता नहीं
वो नहीं है धनी इसमें
मेरी तो खता नहीं

लोगों के मन की जरा
कड़वी बुराई क्यों लिखूं
या जो कुछ सच्चे भी हैं
उनकी भलाई क्यों लिखूं

देखते सब लोग है
क्या बुरा सच्चा है क्या
पर सभी के मन में चलता
हमसे क्या हमसे क्या

लिखने जो बुराइयां बैठा अगर
आशु कब शाम और कब सुबह होगी
सोचने का तरीका गर बदल दें
हर बुराई पे हमारी फतह होगी

Monday, 29 May 2017

Pagal ho gya hun

Pyar ek Aise bhanvar dhara hai jisme agar aap dhara kesath sath chalte hain to beh jayenge  aur behkar ek aise kinare pe niklenge jha ap aur dhara ke siva kuch na hoga
Aur agar iske vipreet tairne ka prayas karenge to doob jayenge ...

Prantu pyar hai ki ho hi jata hai....

Sunday, 28 May 2017

Dard

De do aisi saja mujhko mere khuda
Gam ka pani chhalak de palak se
Meri
Lakho ashiq is gam me nashedi hue
Ek bhi utra na katra halak se
Meri

Prem samjha jise mera pagla sa dil
Roop nagin ne mujhko dasa dansh se
Usne mujhko sikhaya bade pyar se
Pyar pana nahi hai hai mere aansh me

Vo to malika thi yaro husn e sabab thi
Apni jeevan ki sathi samjh baitha tha
Aisi teekhi thi mirchi thi jalim badi
Aisi chhuri se pagla ulajh baitha tha

Aayi ab ye samjh pyar ehsaas hai
Vo kya jane jigar jab hai usme nahi
Pyar karta use marte dam tak ye dil
Vo kya jane fikar jab hai usko
Nahi

Han roop hai jo mili ek amaanat use
Jispe itna itarana bhi achha nahi
Bhale hi mai thoda khoobsoorat na hu
Par mere dil ko thukrana bhi achha nahi

Ek din deewana tera hoga aisi jagah
Duniya chamkegi us din chamak se meri ...
De do aisi saja mujhko mere khuda
Gam ka pani chhalak de palak se
Meri

Oo Maa


Oo maa