Wednesday, 2 August 2017

Shikayat

खुदा तुमसे शिकायत है...

अता कर उनको भी दौलत दिलों की
जिनके हुस्नो के कसीदे पढ़े जाते हैं
उन्हें तो प्यार करना भी दिल्लगी लगती है
नाज ए हुस्न है जिन्हें, बड़ा इतराते हैं

लबों पे हँसी आँखों में आँसू है क्यों?
खुद पे ही रोते हो, हाँ मैंने ठीक देखा है
साथ पाने को पल भर जिसका नाते तोड़े
उसे गैरों की महफ़िलों में शरीक देखा है

ये दिल का लगाना जान ले लेगा यारो
वो हुस्न है नही जलता हुआ अंगारा है
सूरज भी देखो दूर रहके ही रौशनी देता
उसे पाने की गर सोचो कसूर तुम्हारा है

दिया गर मुखड़ा चाँद सा उनको तो
शीशे सा पिघलता हुआ उन्हें दिल देते
या तो दे देते नस्तर हमें कोई ऐसा
अपने अरमान दिल के सारे सिल देते

ना होश खोते उन्हें देख के मुड़ते हुए
ना मर ही जाते उन्हें देख के हस्ते हुए
ना इरादा कोई अरमान या वादा कोई
ना गश खाते उन्हें देख के सजते हुए

पर...

कहदे उनसे कोई हम ऐय्याश नही हैं
उनसे दो बात करते हैं ये शराफत है
वैसे तो गैरों की महफ़िलो में जाना नही होता
उनकी आँखों में डूबने की पर इजाजत है

खुदा तुमसे शिकायत है....

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