तुम...
आनन्द अवर्णनीय आलिंगन हो
एक बच्चे की चंचलता सी
और सन्यासी का चिंतन हो
तुम ताज़ा ताज़ा मलयज सी
गोमती ताप्ती सतलज सी
तुम हरी श्वेत केसरिया हो
और चाँद दूध का मिश्रण हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो
तुम अविरल छाया हो वट की
और बस्ती हो सागर तट की
तुम विकल्प एकमात्र, प्रश्न का
तुम ही हो आनंद जश्न का
तुम प्रगाढ़ वो प्रेम हमारा
तुम झगड़े तुम अनबन हो ..
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो
तुम इंद्र धनुष आकर्षण हो
तुम प्रकृति का परिवर्तन हो
बस तुम ही हो इतिहास मेरा
और तुम भूगोल का दर्शन हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो
तुम बारिश की हर बूँद प्रिये
और बूँद बूँद का प्यासा मैं
तुम शोणित रवि से बनी किरण
तुम धवल चाँद का करो वरण
मैं रक्त-रंग हूँ उजला भी
तुम रंग-प्रभा का ईधन हो
आनंद अवर्णनीय आलिंगन हो