वफ़ा के चर्चो में जिनकी हम मिशाल देते थे
जिनके हौसले हर मुश्किल को टाल देते थे
उन्हें सूरत भी अब वो नागवार लगती है
जिसकी तस्वीर देख दिन वो निकाल देते थे
कहते दर्द आँखों में तुम्हारे ना देख पायेंगे
उनकी इन बातों से लगता वो जरूर आयेंगे
हर तरफ के रास्तों में अब अंधेरे होने लगे
उनका कहना था आये तो तुममे खो जायेंगे
एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम
तुम तो एक पल में आके चले भी गए
ख्याल फिर भी रहा है तुम्हारा सनम..2
एक वादा हुआ था हमारा सनम....
वादा था कि शकल मेरी देखोगे ना
कांच पे मेरे पत्थर भी फेंकोगे ना
मेरी गलियों से आना नहीं होगा अब
नाम मिट्टी में मेरा उकेरोगे ना
मेरे सीने पे सर रख के सोवोगे ना
बाजुओं से लिपटकर के रोवोगे ना
चाहे रोते हुए आंसू बहते रहें
अपने हाथों से आंसू भी पोछोगे ना
बोले थे, हम अलग हैं किनारा सनम..2
एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम
वैसे यूँ तो वफ़ा में तुम मशूहूर हो
पर मुझसे ही क्यों बेवफाई किया
एक वादे से मुझको अपना लो तुम
एक वादे से जैसे पराई किया
या तो कुछ कर दो यादें ना आये तेरी
ये हवाएं वफ़ाएं ना गायें तेरी
किस कदर बे वफ़ा तू है मैं जानती
ये हवाएं गुनाहें बताएं तेरी..
अगर वादा था मेरा ना होने का-2
सपनो में आके फिर क्यों पुकारा सनम...
एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी न दोबारा सनम
क्या कहा था तुमने --
सच्ची मोहब्बत का दावा सभी करते हैं
मुझपे मरते हो तो क्या? सभी मरते हैं
पर सुनो ना बाबु -
पर रूह से मोहब्बत तो तुम्ही करते हो
जिस्म से मोहब्बत यहाँ सभी करते हैं
तोड़ दो सारे वादे हुए जो कभी
तेरे बिन जीना मुझको ना गवारा सनम
एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम
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