Tuesday, 1 August 2017

Ek vada

वफ़ा के चर्चो में जिनकी हम मिशाल देते थे
जिनके हौसले हर मुश्किल को टाल देते थे
उन्हें सूरत भी अब वो नागवार लगती है
जिसकी तस्वीर देख दिन वो निकाल देते थे

कहते दर्द आँखों में तुम्हारे ना देख पायेंगे
उनकी इन बातों से लगता वो जरूर आयेंगे
हर तरफ के रास्तों में अब अंधेरे होने लगे
उनका कहना था आये तो तुममे खो जायेंगे

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

तुम तो एक पल में आके चले भी गए
ख्याल फिर भी रहा है तुम्हारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम....

वादा था कि शकल मेरी देखोगे ना
कांच पे मेरे पत्थर भी फेंकोगे ना
मेरी गलियों से आना नहीं होगा अब
नाम मिट्टी में मेरा उकेरोगे ना

मेरे सीने पे सर रख के सोवोगे ना
बाजुओं से लिपटकर के रोवोगे ना
चाहे रोते हुए आंसू बहते रहें
अपने हाथों से आंसू भी पोछोगे ना

बोले थे, हम अलग हैं किनारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

वैसे यूँ तो वफ़ा में तुम मशूहूर हो
पर मुझसे ही क्यों बेवफाई किया
एक वादे से मुझको अपना लो तुम
एक वादे से जैसे पराई किया

या तो कुछ कर दो यादें ना आये तेरी
ये हवाएं वफ़ाएं ना गायें तेरी
किस कदर बे वफ़ा तू है मैं जानती
ये हवाएं गुनाहें बताएं तेरी..

अगर वादा था मेरा ना होने का-2

सपनो में आके फिर क्यों पुकारा सनम...

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी न दोबारा सनम

क्या कहा था तुमने --
सच्ची मोहब्बत का दावा सभी करते हैं
मुझपे मरते हो तो क्या? सभी मरते हैं

पर सुनो ना बाबु -
पर रूह से मोहब्बत तो तुम्ही करते हो
जिस्म से मोहब्बत यहाँ सभी करते हैं

तोड़ दो सारे वादे हुए जो कभी
तेरे बिन जीना मुझको ना गवारा सनम

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

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