Saturday, 19 August 2017

Pyar

आज सोचा तुम्ही से ये है इश्क़ क्यों
लाखों सूरत और सीरत हैं संसार में

मर मिटा तेरे झूठे से वादों पे क्यों
क्यों फनाः यूँ हुआ मैं तेरे प्यार में

ये अदा शोखियां मस्तियां ये मेरी
मेंरी नीलम सी आँखों की मदहोशियां...

मेरा बच्चों सा दिल है कहाँ तू बता
जा मिले तो तू ले लेना बाजार में

मैं हंसा जोर से उसकी इस बात पे
पूरी बच्ची है दिल भी है मासूम सा

कहती परछाई से साथ क्यों हो मेंरे
क्या कमी है मेरे प्यारे से यार में...

चाँद भी छिप गया बादलों में कहीँ
खुद से प्यारा हुस्न गया देखा नहीं

पत्तियों ने भी गिर कर के पतझड़ किया
कलियों ने भी बगीचों में भगदड़ किया

जब सभी खूबियां इसको दे दी खुदा...
क्यों बनाया हमें फिर बेकार में..

हम ने ये सोच कर तुमको चाहा नहीं
कि अप्सरा मेनका हो या हो तुम परी
हम तो मासूमियत पे फ़िदा हो गए
देख के तेरे चेहरे की जादूगरी

चलो तुमको ले के जाऊँ मैं चाँद पे
कब से बैठा हूँ मैं तेरे इकरार में..

Sunday, 13 August 2017

Kanha ka janamdin

जो काम बड़ा मुश्किल है
करना जो ना मुमकिन है

वो पल भर में कर जाये
कन्हैया का जन्मदिन है

जो मुरली कहीं बजाये
कहीं डाल डाल पे कूदे
कहीं गोपी वस्त्र चुराये
घर घुस जाये आँखे मूदे

जो प्रेम लीला के वश में
विष्णु से बालक बनते
कभी मक्खन चोर कहाते
कभी प्रजा के पालक बनते

कुछ कोई नहीं धरती पे
कुछ भी नहीं जिनके बिन है

उस नटखट नन्द किशोरे
कान्हा का जन्मदिन है

वो माँ की डांट है खाते
जो सारी सृस्टि चलाते
वो हर गोपी के साजन
वो सबसे रास रचाते

जो छीर सागर के मालिक
वो यूँ नवनीत चुराते
जिनके वश में है दुनिया
वो गोपियों से घबराते

ये सब उनकी माया है
वो कण कण है तृन तृन है

जो राज दिलों पे करता
नटराज का जन्मदिन है ..

Wednesday, 2 August 2017

Shikayat

खुदा तुमसे शिकायत है...

अता कर उनको भी दौलत दिलों की
जिनके हुस्नो के कसीदे पढ़े जाते हैं
उन्हें तो प्यार करना भी दिल्लगी लगती है
नाज ए हुस्न है जिन्हें, बड़ा इतराते हैं

लबों पे हँसी आँखों में आँसू है क्यों?
खुद पे ही रोते हो, हाँ मैंने ठीक देखा है
साथ पाने को पल भर जिसका नाते तोड़े
उसे गैरों की महफ़िलों में शरीक देखा है

ये दिल का लगाना जान ले लेगा यारो
वो हुस्न है नही जलता हुआ अंगारा है
सूरज भी देखो दूर रहके ही रौशनी देता
उसे पाने की गर सोचो कसूर तुम्हारा है

दिया गर मुखड़ा चाँद सा उनको तो
शीशे सा पिघलता हुआ उन्हें दिल देते
या तो दे देते नस्तर हमें कोई ऐसा
अपने अरमान दिल के सारे सिल देते

ना होश खोते उन्हें देख के मुड़ते हुए
ना मर ही जाते उन्हें देख के हस्ते हुए
ना इरादा कोई अरमान या वादा कोई
ना गश खाते उन्हें देख के सजते हुए

पर...

कहदे उनसे कोई हम ऐय्याश नही हैं
उनसे दो बात करते हैं ये शराफत है
वैसे तो गैरों की महफ़िलो में जाना नही होता
उनकी आँखों में डूबने की पर इजाजत है

खुदा तुमसे शिकायत है....

Tuesday, 1 August 2017

Ek vada

वफ़ा के चर्चो में जिनकी हम मिशाल देते थे
जिनके हौसले हर मुश्किल को टाल देते थे
उन्हें सूरत भी अब वो नागवार लगती है
जिसकी तस्वीर देख दिन वो निकाल देते थे

कहते दर्द आँखों में तुम्हारे ना देख पायेंगे
उनकी इन बातों से लगता वो जरूर आयेंगे
हर तरफ के रास्तों में अब अंधेरे होने लगे
उनका कहना था आये तो तुममे खो जायेंगे

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

तुम तो एक पल में आके चले भी गए
ख्याल फिर भी रहा है तुम्हारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम....

वादा था कि शकल मेरी देखोगे ना
कांच पे मेरे पत्थर भी फेंकोगे ना
मेरी गलियों से आना नहीं होगा अब
नाम मिट्टी में मेरा उकेरोगे ना

मेरे सीने पे सर रख के सोवोगे ना
बाजुओं से लिपटकर के रोवोगे ना
चाहे रोते हुए आंसू बहते रहें
अपने हाथों से आंसू भी पोछोगे ना

बोले थे, हम अलग हैं किनारा सनम..2

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम

वैसे यूँ तो वफ़ा में तुम मशूहूर हो
पर मुझसे ही क्यों बेवफाई किया
एक वादे से मुझको अपना लो तुम
एक वादे से जैसे पराई किया

या तो कुछ कर दो यादें ना आये तेरी
ये हवाएं वफ़ाएं ना गायें तेरी
किस कदर बे वफ़ा तू है मैं जानती
ये हवाएं गुनाहें बताएं तेरी..

अगर वादा था मेरा ना होने का-2

सपनो में आके फिर क्यों पुकारा सनम...

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी न दोबारा सनम

क्या कहा था तुमने --
सच्ची मोहब्बत का दावा सभी करते हैं
मुझपे मरते हो तो क्या? सभी मरते हैं

पर सुनो ना बाबु -
पर रूह से मोहब्बत तो तुम्ही करते हो
जिस्म से मोहब्बत यहाँ सभी करते हैं

तोड़ दो सारे वादे हुए जो कभी
तेरे बिन जीना मुझको ना गवारा सनम

एक वादा हुआ था हमारा सनम
यूँ मिलोगे कभी ना दोबारा सनम