Sunday, 13 August 2017

Kanha ka janamdin

जो काम बड़ा मुश्किल है
करना जो ना मुमकिन है

वो पल भर में कर जाये
कन्हैया का जन्मदिन है

जो मुरली कहीं बजाये
कहीं डाल डाल पे कूदे
कहीं गोपी वस्त्र चुराये
घर घुस जाये आँखे मूदे

जो प्रेम लीला के वश में
विष्णु से बालक बनते
कभी मक्खन चोर कहाते
कभी प्रजा के पालक बनते

कुछ कोई नहीं धरती पे
कुछ भी नहीं जिनके बिन है

उस नटखट नन्द किशोरे
कान्हा का जन्मदिन है

वो माँ की डांट है खाते
जो सारी सृस्टि चलाते
वो हर गोपी के साजन
वो सबसे रास रचाते

जो छीर सागर के मालिक
वो यूँ नवनीत चुराते
जिनके वश में है दुनिया
वो गोपियों से घबराते

ये सब उनकी माया है
वो कण कण है तृन तृन है

जो राज दिलों पे करता
नटराज का जन्मदिन है ..

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