जो काम बड़ा मुश्किल है
करना जो ना मुमकिन है
वो पल भर में कर जाये
कन्हैया का जन्मदिन है
जो मुरली कहीं बजाये
कहीं डाल डाल पे कूदे
कहीं गोपी वस्त्र चुराये
घर घुस जाये आँखे मूदे
जो प्रेम लीला के वश में
विष्णु से बालक बनते
कभी मक्खन चोर कहाते
कभी प्रजा के पालक बनते
कुछ कोई नहीं धरती पे
कुछ भी नहीं जिनके बिन है
उस नटखट नन्द किशोरे
कान्हा का जन्मदिन है
वो माँ की डांट है खाते
जो सारी सृस्टि चलाते
वो हर गोपी के साजन
वो सबसे रास रचाते
जो छीर सागर के मालिक
वो यूँ नवनीत चुराते
जिनके वश में है दुनिया
वो गोपियों से घबराते
ये सब उनकी माया है
वो कण कण है तृन तृन है
जो राज दिलों पे करता
नटराज का जन्मदिन है ..
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