Saturday, 19 August 2017

Pyar

आज सोचा तुम्ही से ये है इश्क़ क्यों
लाखों सूरत और सीरत हैं संसार में

मर मिटा तेरे झूठे से वादों पे क्यों
क्यों फनाः यूँ हुआ मैं तेरे प्यार में

ये अदा शोखियां मस्तियां ये मेरी
मेंरी नीलम सी आँखों की मदहोशियां...

मेरा बच्चों सा दिल है कहाँ तू बता
जा मिले तो तू ले लेना बाजार में

मैं हंसा जोर से उसकी इस बात पे
पूरी बच्ची है दिल भी है मासूम सा

कहती परछाई से साथ क्यों हो मेंरे
क्या कमी है मेरे प्यारे से यार में...

चाँद भी छिप गया बादलों में कहीँ
खुद से प्यारा हुस्न गया देखा नहीं

पत्तियों ने भी गिर कर के पतझड़ किया
कलियों ने भी बगीचों में भगदड़ किया

जब सभी खूबियां इसको दे दी खुदा...
क्यों बनाया हमें फिर बेकार में..

हम ने ये सोच कर तुमको चाहा नहीं
कि अप्सरा मेनका हो या हो तुम परी
हम तो मासूमियत पे फ़िदा हो गए
देख के तेरे चेहरे की जादूगरी

चलो तुमको ले के जाऊँ मैं चाँद पे
कब से बैठा हूँ मैं तेरे इकरार में..

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