चाहो उसको पिला दो नशा नैन से
या तो मर जाने दो गोद में चैन से
चाहे जीने की कोई वजह दे दो तुम
या प्यार करने की कोई सजा दे दो तुम
नासमझ है थोड़ा थोड़ा पागल भी है
पाने को साथ तेरा वो व्याकुल भी है
कहीं ऐसा जखम ना दे देना सनम
घाव जिसका कहीं ना दिखा वो सके
अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके
चलो माना कई हैं ऐसे आशिक़ तेरे
कौन लेगा सितम उसके माफिक तेरे
कौन देगा तुझे फिर तौफा-हँसी
कौन झूठे वादों पे करेगा यकीं
कौन सपनो को तेरे जियेगा यहाँ
ऐसे आशिक़ जमाने में मिलते कहाँ
ऐसी कीमत ना रख देना दिल देने की
जिसकी कीमत कभी ना चुका वो सके
अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके
चाहे दिल में बस अपने जगह भर ही दो
या प्यार है उससे झूठी सी हाँ कर ही दो
तेरे इकरार नामे से शायद हसीं
मरता उसका जिसम भी जवां हो सके
अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके