अति कोमल, चंचल सरिता सी,
रक्त ललित होंठो की लाली
नैन नशे से भरे परे
परे जिनके एक संसार
धीरे धीरे
सबकुछ मुझको भुला रहा है
आओ यौवन बुला रहा है
सेज सजा है फूलों वाला
अरमानो के तकिये पर
छोड़ने आएंगी सखिया
जैसे भोर का कोहरा
सुन्दर चाँद को ...
धीरे धीरे
देखो खुद में मिला रहा है
आओ यौवन बुला रहा है
ये बस एक छन भर है
अमृत टपकेगा अधरों से
प्यासी है धरती मेरी
इसे चाहिए पहली वर्षा
वो वर्षा जिसका
पानी
धीरे धीरे
देखो तुमको भिगा रहा है
आओ यौवन बुला रहा है
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