अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके
कहीं ऐसी तलब इनकी लग जाये ना
उम्र भर वो कभी ना जुदा हो सके
हीरे जैसी चमक तेरी आँखों में है
इस फ़िज़ा की महक तेरी सांसो में है
हर मरज की दवा तेरी बाँहों में है
हर तरफ की हवा तो पनाहों में है
चाँद को दूध में घोल कर हो बनी
कहीं बरसात कर दें न जुल्फें घनी
मर्ज ऐसा कहीं उसको हो जाये ना
हर शहर में ना जिसकी दवा हो सके
आँख में आँख डाले अगर वो कहीं
आँख अपनी कहीं वो उठा ना सके
अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके
चाहो तो ए सनम तुम तबाही बनो
चाहे जीने के मेरे वजहही बनो
तिरछी नजरों से पल भर में घायल करो
या तो नजरें झुका करके पागल करो
दिल तो दे ही दिया चाहे खेलो उसे
चाहे बाँहों में अपनी ले लो उसे
देखो कईयों के दिल से न खेला करो
कहीं तुमसा कोई ना बे वफ़ा हो सके
अपनी जालिम सी नजरें हटा लो जरा
कोई अंजाने में ना फ़िदा हो सके
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