बड़े शौक से रखता है दुकानदार बकायेदारों का...
वो हिसाब बनना चाहता हूँ
प्रेमी का प्रेम ग्रन्थ हताश की आश पढ़ने वाले की मनपंसद
एक किताब बनना चाहता हूँ
देखते हो आप मेरे माँ बाप मेरे हितजन जो रात दिन
वो ख्वाब बनना चाहता हू
बिगड़े तो बहुत हैं पैसे वाले भी हैं, हाँ भले ही गरीब
पर नायाब बनना चाहता हूँ
करते हैं बलात्कार वो बेकार कुत्ते जो उनके लिए जलने वाला
वो तेज़ाब बनना चाहता हूँ
एक अच्छा दोस्त अच्छा बेटा अच्छा भाई अच्छा पति भी
और अच्छा बाप बनना चाहता हूँ
पढ़ सकूँ पढ़ा सकूँ सीखा हूँ जो सिखा सकूँ
जानने की प्यास बुझा दूँ
वो आब बनना चाहता हूँ
विशाल हाथी जैसे भ्रष्टाचार को उखाड़ जो फेंके कहीँ
वो उकाब बनना चाहता हूँ
हिन्दू हूँ मुस्लिम हूँ सिख हूँ ईसाई हूँ जयकारा संखनाद प्रणाम हूँ
और इंकलाब बनना चाहता हूँ
No comments:
Post a Comment